Tere siva


In continuity with the previous post, the relatable Sufi expression-

ऐ मेरे प्राण प्रियतम,
मुझको तेरे सिवा कुछ भी नहीं चाहिए।
दूर करदे जो सावल मुझे तेरे प्यार से,
ऐसी शान और शौकत नहीं चाहिए।
तेरे दर की मिले जो गुलामी मुझे,
दो जहान की हुकूमत नहीं चाहिए।
तेरे गम से बड़ी है मोहब्बत मुझे,
मुझको झूठी मसर्रत नहीं चाहिए।
ऐ कन्हैया मेरे मैं वो बीमार हूं,
जिसको दुनिया की राहत नहीं चाहिए।
मेरी शान फकीरी सलामत रहे,
मेरे दिल में तुम्हारी मोहब्बत रहे
मेरे दिल पे तेरी बादशाहत रहे।
तेरी करुणा पे मुझको बड़ा नाज़ है
मैं हूं चाकर तूं मेरा महाराज है।
मुझको तेरे सिवा कुछ भी नहीं चाहिए।

-Shri Vinod Ji Agarwal

The prayer of St.Ignatius of Loyola is the best fit translation of the above written lines –

Take and receive O Lord my liberty,
Take all my will, my mind, my memory.
All the things I have and I own are Thine;
Thine was the gift, to Thee I all resign.
Do thou direct & govern all & sway,
Do what Thou will, command & I obey.
Only Thy grace, Thy love on me bestow,
Possessing these, all riches I forgo.

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